150+ Zakir khan best Shayari in Hindi ll जाकिर खान हिंदी में सबसे अच्छी शायरी
Zakir khan best shayari in hindi
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Zakir khan best shayari in hindi
मेरी जमीन तुमसे गहरी रही है, वक़्त आने दो, आसमान भी तुमसे ऊंचा रहेगा। मेरी औकात मेरे सपनों से इतनी बार हारी हैं के अब उसने बीच में बोलना ही बंद कर दिया है। हर एक दस्तूर से बेवफाई मैंने शिद्दत से हैं निभाई रास्ते भी खुद हैं ढूंढे और मंजिल भी खुद बनाई। मेरे घर से दफ्तर के रास्ते में तुम्हारी नाम की एक दुकान पढ़ती हैं विडंबना देखो, वहां दवाइयां मिला करती है। अब वो आग नहीं रही, न शोलो जैसा दहकता हूँ, रंग भी सब के जैसा है, सबसे ही तो महेकता हूँ… एक आरसे से हूँ थामे कश्ती को भवर में, तूफ़ान से भी ज्यादा साहिल से डरता हूँ… जिस गुलदान को तुम अज्ज अपना कहते हो, उसका फूल कभी हमारा था, हु जो अब तुम उसके मुक्तहार हो तोह सुन लो, उससे अच्छा…
zakir khan motivational quotes in hindi
मेरी अपनी और उसकी आरज़ू में फर्क ये था मुझे बस वो… और उसे सारा जमाना चाहिए था। इश्क़ किया था हक से किया था सिंगल भी रहेंगे तो हक से । तुम भी कमाल करते हों , उम्मीदें इंसान से लगा कर शिकवे भगवान से करते हो। गर यकीन ना हों तो बिछड़ कर देख लो तुम मिलोगे सबसे मगर हमारी ही तलाश में। बे वजह बेवफाओं को याद किया है, ग़लत लोगों पे बहुत वक़्त बर्बाद किया है। माना की तुमको इश्क़ का तजुर्बा भी कम नहीं, हमने भी बाग़ में हैं कई तितलियाँ उड़ाई..
Zakir Khan Poem on life
बस का इंतज़ार करते हुए, मेट्रो में खड़े खड़े रिक्शा में बैठे हुए गहरे शुन्य में क्या देखते रहते हो? गुम्म सा चेहरा लिए क्या सोचते हो? क्या खोया और क्या पाया का हिसाब नहीं लगा पाए न इस बार भी? ……घर नहीं जा पाए न इस बार भी? चार दिन की रोड ट्रिप है पर हम व्हील पे नहीं सोएंगे एक छोटा सा किस्सा भी हो जाए… तोह उसे बढ़ा चढ़ा के सुनायेंगे पर जब दिल टूटेगा न तोह अपने दोस्तों को भी नहीं बताएँगे क्योंकि सब सम्भाल लेते हैं हम. अपने आप से भी पीछे खड़ा हूँ मैं अपने आप से भी पीछे खड़ा हूँ मैं ज़िंदगी कितना धीरे चला हूँ मैं अपने आप से भी पीछे खड़ा हूँ मैं ज़िंदगी कितना धीरे चला हूँ मैं मुझे जगाने जो और भी हसीन होक आते थे उन ख्वाबो को सच समझ क्र सोया रहा हु मैं ज़िंदगी कितना धीरे चला हु मैं अब कोई हक़ से हाथ पकड़कर महफ़िल में दोबारा नहीं बैठाता, सितारों के बीच से सूरज बनने के कुछ अपने ही नुकसान हुआ करते है.. वो तितली की तरह आयी और ज़िन्दगी को बाग कर गयी मेरे जितने भी नापाक थे इरादे, उन्हें भी पाक कर गयी। मई वक़्त और तुम क़यामत. देखना, जब हम मिलेंगे तोह इस कायनात में सब कुछ रुक जायेगा. मेरे इश्क़ में उम्मीद है.
Zakir khan poem in Hindi
अपने आप के भी पीछे खड़ा हूँ में, ज़िन्दगी , कितने धीरे चला हूँ मैं… और मुझे जगाने जो और भी हसीं होकर आते थे, उन् ख़्वाबों को सच समझकर सोया रहा हूँ मैं…. यूँ तोह भूले हैं हम लोग कई, पहले भी बहुत से, पर तुम जितना कोई उनमें से, कभी याद नहीं आया… मेरे कुछ सवाल है जो सिर्फ क़यामतट के रोज पूछूँगा तुमसे, क्युकी उसके पहले तुम्हारी और मेरी बात हो सके इस लायक नहीं हो तुम… दुश्मनों की जफ़ा का ख़ौफ़ नहीं दोस्तों की वफ़ा से डरते हैं मोह्हबत करो बहोत, लेकिन खुद के इज़्ज़त के साथ करो. रास्ते भी खुद है ढूँढे, और मंज़िल भी खुद बनायीं, आप उसे किताबों में डालकर मुश्किल न कीजिये.
zakir khan quotes in hindi
तेरी बेवफ़ाई के अंगारों में लिपटी रही यह रूह मेरी, मैं इस तरह आग न होता, जो होजाती तू मेरी. दिल तो रोता रहे ओर आँख से आँसू न बहे इश्क़ की ऐसी रिवायात ने दिल तोड़ दिया!! हम से पूछो न दोस्ती का सिला दुश्मनों का भी दिल हिला देगा ! ऐ अदम के मुसाफ़िरो होशियार राह में ज़िंदगी खड़ी होगी! तेरी शर्तः पे ही करना है! अगर तुझ को क़ुबूल ये सहूलत तो मुझे सारा जहाँ देता है.. हम से पूछो न दोस्ती का सिला दुश्मनों का भी दिल हिला देगा !
Zakir Khan thoughts in Hindi
एक अरसे से हूं थामे कस्ती को भवार, तूफान से भी ज्यादा साहिल से सिहरता हु. जरूरी नहीं कि हर मेहनत कामयाबी ले आए, कुछ कोशिशें तैयारी के लिए भी होती है. अब वो आग नहीं रही ना शोलो सा देहेक्ता हूं, रंग भी सबके जैसे है और सब के जैसा है महकता है. क्या आप अपनी छोटी उंगली से उसका हाथ पकड़ते हैं? ऐसे ही वो मुझे पकड़ती थी। । ! ! मित्रता कभी दर्पण से अधिक समय तक नहीं रहती है इस तरह की ईमानदारी भी रिश्तों के लिए ठीक नहीं है हम से पूछो न दोस्ती का सिला दुश्मनों का भी दिल हिला देगा !
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