Sad Shayari & Quotes

Sad Shayari & Quotes in Hindi

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इश्क़ अधूरा रहा तो क्या हुआ,
हम तो पूरे बर्बाद हुए।
अल्फ़ाज़ सिर्फ चुभते हैं,
खामोशियां मार देते हैं।
तुम्हे शिकायत है की मुझे बदल दिया वक़्त ने
खुद से पूछो, क्या तुम वही हो
वक्त की तरह निकल गया वो,
नजदीक से भी और तकदीर से भी..!
लाख चाहूं कि तुझे याद ना करूं मगर,
इरादा अपनी जगह, बेबसी अपनी जगह..!!
इश्क़ खुदकुशी का धंधा है,
“अपनी ही लाश अपना ही कंधा है”
कभी सोचा न था इतनी जल्दी खत्म कर दोगे रिश्ता हमसे,
मिले तो यूं थे जैसे सदियों साथ निभाओगे।
कुछ अजीब सा चल रहा है, ये वक्त का सफर…
एक गहरी सी खामोशी है खुद के ही अंदर…
जिंदगी में कुछ हसीन पल यूंही गुजर जाते हैं
रह जाती हैं यादें और इंसान बिछड़ जाते हैं।
दुश्मनो की अब किसे जरूरत है
अपने ही काफी है दर्द देने के लिए
मोहब्बत में हम उन्हें भी हारे है
जो कहते थे हम सिर्फ तुम्हारे है
ज़ख़्म दे कर ना पूछ तू मेरे दर्द की शिद्दत
दर तो फिर दर्द है काम क्या ज्यादा क्या
जिंदगी में कुछ हसीन पल यूंही गुजर जाते हैं,
रह जाती हैं यादें और इंसान बिछड़ जाते हैं।
कोई ताबीर नहीं थी जिसमें
हमने वो ख़्वाब मुसलसल देखा
खामोशियां कभी बेवजह नहीं होती
कुछ दर्द ऐसे भी होते है जो आवाज़ छीन लेती है
तुझसे अच्छे तो जख्म हैं मेरे ।
उतनी ही तकलीफ देते हैं जितनी बर्दास्त कर सकूँ
तेरे बाद मैंने मोहब्बत को,
जब भी लिखा गुनाह लिखा।
अल्फ़ाज़ सिर्फ चुभते हैं,
खामोशियां मार देते हैं।
मेरी हर आह को वाह मिली है यहाँ…..
कौन कहता है दर्द बिकता नहीं है !
ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया
जाने क्यूँ आज तेरे नाम पे रोना आया
तुझसे अच्छे तो जख्म हैं मेरे ।
उतनी ही तकलीफ देते हैं जितनी बर्दास्त कर सकूँ
तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो
क्या ग़म है जिस को छुपा रहे हो
अपनी हालत का खुद एहसास नहीं है मुझ को
मैं ने औरों से सुना है के परेशां हूँ मैं
इस भरी दुनिया में कोई भी हमारा न हुआ
ग़ैर तो ग़ैर हैं अपनों का सहारा न हुआ
तुम क्या जानो अपने आप से कितना मैं शर्मिंदा हूँ
छूट गया है साथ तुम्हारा और अभी तक ज़िंदा हूँ
मैं हूँ दिल है तन्हाई है
तुम भी होते अच्छा होता
दीवारों से मिल कर रोना अच्छा लगता है
हम भी पागल हो जाएँगे ऐसा लगता है
मौत के नाम से… सुकून मिलने लगा…
जिंदगी ने… कम नही सताया हमको
सिमट गया मेरा प्यार भी चंद अल्फाजों में,
जब उसने कहा मोहब्बत तो है पर तुमसे नहीं.
मैं रोना चाहता हूँ खूब रोना चाहता हूँ मैं
फिर उस के बाद गहरी नींद सोना चाहता हूँ मैं
बहाना क्यों बनाते हो नाराज होने का कह क्यों नही देते के अब दिल मे ज गह नही तुम्हारे लिए।
ये मुहब्बत भी क्या रोग है फ़राज़,
जिसे भूले वो सदा याद आया।
अजीब सा दर्द है इन दिनों यारों,
न बताऊं तो ‘कायर’, बताऊँ तो ‘शायर’।
मेरे सब्र की इन्तेहाँ क्या पूछते हो 'फ़राज़'
वो मेरे सामने रो रहा है किसी और के लिए।
वो तो शायरों ने लफ्जो से सजा रखा है,
वरना मोहब्बत इतनी भी हसीँ नही होती।
बिखर जाते हैं..... सर से पाँव तक, वो लोग...
जो किसी बेपरवाह से बे-पनाह इश्क करते है।

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